सांसद जी! वादा किया था सड़क बनवाने का, अब गांव की सुध लेने क्यों नहीं आए? पीरटांड में गिरिडीह सांसद के खिलाफ ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, नावाडीह में जनता ने रोका काफिला
चुनावी वादे को लेकर युवाओं ने सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी से मांगा जवाब, जर्जर सड़क बनी जनप्रतिनिधियों के प्रति नाराजगी की वजह

रिंकेश कुमार गिरिडीह। चुनाव में वादे, जीत के बाद इंतजार और सड़क पर उतरकर जवाब मांगती जनता! पीरटांड प्रखंड के नावाडीह गांव में रविवार को कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जब जर्जर सड़क से परेशान ग्रामीणों ने गिरिडीह सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी और आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो के काफिले को रोक दिया। सड़क की बदहाली को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश इस कदर सामने आया कि सांसद को अपनी गाड़ी से उतरकर लोगों के सवालों का सामना करना पड़ा।
आजसू के कार्यक्रम के बाद जब सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी और सुदेश महतो का काफिला नावाडीह गांव के पास पहुंचा, तो स्थानीय युवाओं ने सड़क पर उतरकर उसे रोक लिया। ग्रामीणों की नाराजगी का मुख्य कारण गांव की लंबे समय से जर्जर पड़ी सड़क थी। लोगों का कहना था कि सड़क निर्माण को लेकर चुनाव के समय वादा किया गया था, लेकिन चुनाव जीतने के बाद उनकी समस्या पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया।


वादा याद दिलाया, तो जनता ने मांगा हिसाब
ग्रामीणों ने सांसद से सवाल करते हुए कहा कि चुनाव के दौरान सड़क बनवाने का आश्वासन दिया गया था। यहां तक कहा गया था कि चुनाव में जीत हो या हार, सड़क को दुरुस्त कराया जाएगा। इसके बावजूद सड़क की स्थिति में सुधार नहीं हुआ। ग्रामीणों की शिकायत थी कि उनकी परेशानी जस की तस बनी हुई है और उन्हें रोजाना खराब सड़क से जूझना पड़ रहा है। ग्रामीणों के सवालों ने जनप्रतिनिधियों के प्रति जनता की नाराजगी को खुलकर सामने ला दिया। युवाओं का विरोध केवल सड़क की बदहाली तक सीमित नहीं था, बल्कि चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा नहीं किए जाने की शिकायत भी इसमें साफ झलक रही थी।
सुदेश महतो ने संभाली स्थिति, सांसद को उतरना पड़ा गाड़ी से
ग्रामीणों को सड़क पर विरोध करते देख आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो अपनी गाड़ी से उतरे और लोगों से बातचीत शुरू की। कुछ देर बाद उन्होंने सांसद से भी ग्रामीणों से बात करने को कहा। इसके बाद सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी अपनी एसयूवी से उतरे और लोगों की बात सुनी। सांसद ने ग्रामीणों से कहा, “हमलोग का काम टेंडर और अनुशंसा करना है। काम तो ठेकेदार को ही करना है ना।” इस पर ग्रामीणों ने उन्हें चुनाव के दौरान किए गए वादे की याद दिलाई और सड़क की समस्या को लेकर अपनी नाराजगी जताई।
सड़क की बदहाली ने खोली विकास के दावों की पोल!
नावाडीह में ग्रामीणों का यह विरोध क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं को लेकर जनता की बेचैनी को उजागर करता है। जर्जर सड़क से परेशान ग्रामीणों ने अपने जनप्रतिनिधि के सामने सीधे सवाल रखकर यह संदेश दिया कि चुनाव के समय किए गए वादों को अनदेखा नहीं किया जा सकता। जनता को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर काम चाहिए।
बाद में सुदेश महतो ने ग्रामीणों को समझाया, जिसके बाद लोगों ने सड़क से हटकर काफिले को आगे जाने दिया। हालांकि, इस घटनाक्रम ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया कि आखिर गांव की जर्जर सड़क कब बनेगी और ग्रामीणों को इस परेशानी से कब निजात मिलेगी?
वहीं नावाडीह की जनता का ने साफ़ संदेश दिया है—कि चुनाव में वादा करने वाले जनप्रतिनिधियों को जनता के सवालों का जवाब भी देना होगा और विकास के दावों को जमीन पर उतारना भी होगा।

