शरदीय नवरात्र का शुभारंभ: भक्ति और उल्लास के साथ माँ शक्ति की आराधना में डूबे भक्त
माँ शक्ति के प्रथम स्वरूप माता शैलपुत्री की है दिव्य महिमा

रिंकेश कुमार गिरिडीह। शरदीय नवरात्र का पावन पर्व आते ही चारों ओर भक्ति, श्रद्धा और उल्लास की दिव्य आभा फैल जाती है। मंदिरों में गूंजती घंटियों की मधुर ध्वनि, धूप-दीप की सुगंध और भक्तों के मुख से निकलते जयकारे वातावरण को आध्यात्मिक बना देते हैं। नौ दिनों तक चलने वाले इस पवित्र पर्व में माँ दुर्गा के नौ दिव्य स्वरूपों की श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की जाती है।
रविवार को कलश स्थापना के साथ ही शारदीय नवरात्र का शुभारंभ हो गया। विभिन्न दुर्गा मंदिरों और श्रद्धालुओं के घरों में माँ शक्ति की उपासना आरंभ हो गई। नवरात्र के प्रथम दिन भक्तों ने माँ शक्ति के प्रथम स्वरूप माता शैलपुत्री की भावपूर्ण पूजा-अर्चना कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और मंगलमय जीवन की कामना की।


माता शैलपुत्री का स्वरूप और संदेश
नवरात्र के प्रथम दिन माँ शैलपुत्री की पूजा की जाती है। शैलपुत्री का अर्थ है—पर्वतराज हिमालय की पुत्री। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता शैलपुत्री अपने पूर्व जन्म में राजा दक्ष की पुत्री सती थीं। भगवान शिव के प्रति उनके अटूट प्रेम और समर्पण ने उन्हें अद्वितीय शक्ति प्रदान की। अगले जन्म में वे हिमालय के घर पुत्री के रूप में अवतरित हुईं और शैलपुत्री कहलायीं।
माता शैलपुत्री वृषभ पर विराजमान रहती हैं। उनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में कमल सुशोभित है। उनका शांत, तेजस्वी और करुणामयी स्वरूप शक्ति, पवित्रता, धैर्य और दृढ़ संकल्प का प्रतीक माना जाता है।
शरदीय नवरात्र का प्रथम दिन हमें यह पावन संदेश देता है कि जीवन में कैसी भी कठिनाइयाँ क्यों न आएँ, हमें अपने विश्वास, साहस और भक्ति का दीपक सदैव प्रज्वलित रखना चाहिए।

