पचंबा नर्मदा धाम में 2100 कलशों के साथ निकली भव्य कलश यात्रा, मां दुर्गा के जयकारों से गुंजायमान हुआ पचंबा
सार्वजनिक दुर्गा माता मंदिर में कलश स्थापन के साथ हुई माँ शैलपुत्री की पूजा

गिरिडीह। गिरिडीह की उपनगरी पचंबा को शारदीय नवरात्र के मौके पर भक्ति और आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। 2100 कलशों के साथ निकली भव्य कलश यात्रा में हज़ारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। मां दुर्गा के जयकारों, भक्ति गीतों और ढोल-नगाड़ों की गूंज से पूरा इलाका भक्तिमय हो उठा।
कलश यात्रा की शुरुआत नर्मदा धाम से हुई। पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ श्रद्धालुओं का जत्था बरतर काली मंदिर और पचंबा बाजार होते हुए सार्वजनिक दुर्गा माता मंदिर पहुंचा। यात्रा के दौरान रास्ते में जगह-जगह स्थानीय लोगों ने श्रद्धालुओं का स्वागत किया। श्रद्धालु मां दुर्गा की आराधना करते हुए परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना करते नजर आए।


धार्मिक झांकियों ने मोहा श्रद्धालुओं का मन
कलश यात्रा में भक्ति और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिला। ढोल-नगाड़ों और डीजे की धुन पर श्रद्धालु भक्ति में झूमते रहे। भगवान शंकर, भगवान गणेश और मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आकर्षक झांकियों से सजे वाहन यात्रा की शोभा बढ़ा रहे थे।
धार्मिक झांकियों और आकर्षक साज-सज्जा को देखने के लिए रास्ते में लोगों की भीड़ जुटी रही। मां दुर्गा के जयकारों से पूरा पचंबा क्षेत्र गुंजायमान होता रहा।
विधि-विधान से हुई कलश स्थापना, शुरू हुई मां की आराधना
कलश यात्रा के सार्वजनिक दुर्गा माता मंदिर पहुंचने के बाद विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की गई। वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच कलश स्थापना संपन्न हुई। इसके साथ ही मां दुर्गा की पूजा के साथ शारदीय नवरात्र का शुभारंभ हो गया। श्रद्धालुओं ने माता के चरणों में माथा टेककर परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और मंगलमय जीवन की प्रार्थना की। कलश स्थापना के बाद मंदिर परिसर समेत पचंबा और आसपास के क्षेत्रों में नौ दिनों तक चलने वाली पूजा-अर्चना को लेकर उत्साह का माहौल बन गया।
1880 से जुड़ा है सार्वजनिक दुर्गा माता मंदिर का इतिहास
पचंबा स्थित सार्वजनिक दुर्गा माता मंदिर का इतिहास वर्ष 1880 से जुड़ा हुआ है। यह मंदिर लंबे समय से स्थानीय लोगों की धार्मिक आस्था और परंपराओं का प्रमुख केंद्र रहा है। प्रत्येक वर्ष शारदीय नवरात्र के दौरान यहां विधिवत मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की जाती है। इस अवसर पर क्षेत्र के साथ-साथ आसपास के इलाकों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

