दुर्गा पूजा को लेकर पचंबा थाना में शांति समिति की बैठक
सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण और सोशल मीडिया पर निगरानी को लेकर बनी रणनीति

गिरिडीह/पचम्बा : आगामी दुर्गा पूजा को शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण एवं सुरक्षित माहौल में संपन्न कराने को लेकर रविवार को पचंबा थाना परिसर में शांति समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में पुलिस अधिकारियों के अलावा क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, समाजसेवी एवं गणमान्य लोग शामिल हुए। इस दौरान पूजा के दौरान विधि-व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुरक्षा और पूजा पंडालों में आवश्यक सुविधाओं को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में साइबर थाना प्रभारी सह इंस्पेक्टर एवं पचंबा थाना प्रभारी की मौजूदगी में पूजा के दौरान संभावित चुनौतियों और सुरक्षा इंतजामों पर विचार-विमर्श किया गया। उपस्थित प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं और आवश्यकताओं से पुलिस को अवगत कराया।


पंडालों में सीसीटीवी और पर्याप्त रोशनी पर जोर
बैठक में पूजा पंडालों एवं आसपास के इलाकों में सीसीटीवी कैमरे लगाने, पर्याप्त रोशनी, साफ-सफाई, भीड़ नियंत्रण और पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती पर विशेष जोर दिया गया। संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त निगरानी रखने की आवश्यकता भी बताई गई।
पुलिस प्रशासन की ओर से सोशल मीडिया पर भी पैनी नजर रखने की बात कही गई। किसी भी तरह की अफवाह, आपत्तिजनक पोस्ट या भ्रामक सूचना सामने आने पर तत्काल पुलिस को सूचना देने की अपील की गई। लोगों से कानून हाथ में नहीं लेने और किसी भी विवाद की स्थिति में पुलिस को सूचित करने को कहा गया।
सौहार्द बनाए रखने में सहयोग का भरोसा
शांति समिति के सदस्यों ने कहा कि दुर्गा पूजा आस्था और उत्साह का पर्व है। सभी पूजा समितियों और स्थानीय लोगों की जिम्मेदारी है कि पर्व के दौरान आपसी भाईचारा एवं सामाजिक सौहार्द बना रहे। बैठक में मौजूद लोगों ने शांतिपूर्ण आयोजन में पुलिस-प्रशासन को हरसंभव सहयोग देने का भरोसा दिलाया।
बैठक में पचम्बा दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष संजय कन्धवे, परसाटांड़ के पूर्व मुखिया निर्मल प्रसाद, समाजसेवी संजय झा, अनवर अंसारी, अजय राय, इरफान आलम, समाजसेवी मिंटू, वार्ड पार्षद कृष्णा साव, मुमताज अंसारी समेत क्षेत्र के कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
बैठक के माध्यम से पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया गया, ताकि दुर्गा पूजा के दौरान पचंबा क्षेत्र में शांतिपूर्ण माहौल कायम रहे और श्रद्धालु निर्बाध रूप से पूजा-अर्चना कर सकें।

