बाजार में छोटे नोटों की कमी पर सुनील खंडेलवाल ने RBI से मांगा जवाब
₹5, ₹10 और ₹20 के नोटों व सिक्कों की छपाई, झारखंड में आपूर्ति और बैंकों को वितरण का मांगा ब्योरा

गिरिडीह : गिरिडीह के बाजारों में ₹5, ₹10 और ₹20 मूल्यवर्ग के नोटों एवं सिक्कों की कथित कमी को लेकर सामाजिक एवं सूचना अधिकार कार्यकर्ता सुनील कुमार खंडेलवाल ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से जवाब मांगा है। उन्होंने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत आरबीआई के केंद्रीय लोक सूचना पदाधिकारी को ऑनलाइन आवेदन भेजकर इन मूल्यवर्ग के नोटों की छपाई और झारखंड में उनकी आपूर्ति से संबंधित विस्तृत जानकारी मांगी है।
खंडेलवाल के अनुसार, पिछले कई महीनों से छोटे मूल्यवर्ग के नोटों और सिक्कों की कमी के कारण आम नागरिकों, छोटे दुकानदारों तथा फुटकर विक्रेताओं को रोजमर्रा के नकद लेन-देन में परेशानी हो रही है। खुले पैसे उपलब्ध नहीं होने से खुदरा भुगतान और बाजार में सामान्य लेन-देन प्रभावित हो रहा है।


नोटों की छपाई और आपूर्ति का मांगा ब्योरा
आरटीआई आवेदन में 1 अप्रैल 2026 से आवेदन की तिथि तक ₹5, ₹10 और ₹20 के नोटों की माहवार छपाई का विवरण मांगा गया है। इसके साथ ही झारखंड में इन नोटों की मूल्यवर्गवार और तिथिवार अथवा माहवार आपूर्ति की जानकारी भी मांगी गई है।
आवेदन में यह भी पूछा गया है कि राज्य के किन-किन बैंकों और उनकी करेंसी चेस्ट शाखाओं को कितनी मात्रा में नोट उपलब्ध कराए गए। इसके अतिरिक्त झारखंड के लिए निर्धारित आपूर्ति और वास्तविक आपूर्ति के बीच किसी अंतर की स्थिति में उससे संबंधित अभिलेखों और दर्ज कारणों का विवरण उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है।
श्री खंडेलवाल ने संबंधित अभिलेखों, विवरणियों और रिपोर्टों की प्रमाणित प्रतियां हिंदी अथवा अंग्रेजी में उपलब्ध कराने की मांग की है।
पारदर्शिता से स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति

सुनील कुमार खंडेलवाल का कहना है कि छोटे मूल्यवर्ग के नोट आम लोगों के दैनिक जीवन और बाजार की नकद अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। सब्जी, किराना, परिवहन और अन्य छोटे भुगतानों में इनकी जरूरत पड़ती है। ऐसे में इनकी पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि आरटीआई आवेदन का उद्देश्य आधिकारिक आंकड़ों और अभिलेखों के आधार पर यह पता लगाना है कि छोटे मूल्यवर्ग के नोटों की छपाई और झारखंड में आपूर्ति की वास्तविक स्थिति क्या है। यदि निर्धारित और वास्तविक आपूर्ति के बीच कोई अंतर है, तो उसके कारणों की जानकारी भी सामने आनी चाहिए।
खंडेलवाल ने उम्मीद जताई कि आरबीआई से सूचना मिलने के बाद इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट होगी और आम लोगों को हो रही परेशानी के समाधान के लिए संबंधित स्तर पर आवश्यक पहल की जा सकेगी।

