Nav Bihan
हर खबर पर पैनी नजर

सुदिव्य सोनू के निधन पर झारखंड में शोक, राष्ट्रीय नेताओं की चुप्पी बनी चर्चा का विषय

राजनीति के बड़े राष्ट्रीय चेहरों की सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आने पर उठे सवाल

0 9

नीरज कुमार तिवारी: झारखंड मुक्ति मोर्चा के वरिष्ठ एवं सक्रिय नेता तथा राज्य सरकार में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के असामयिक निधन से पूरे झारखंड में शोक की लहर है। उनके निधन की खबर सामने आते ही राजनीतिक दलों के नेताओं, जनप्रतिनिधियों, झामुमो कार्यकर्ताओं, समर्थकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से श्रद्धांजलि देने का सिलसिला शुरू हो गया। गिरिडीह से लेकर रांची तक लोगों ने उनके साथ बिताए राजनीतिक और व्यक्तिगत पलों को याद करते हुए उनके योगदान को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया।

सुदिव्य कुमार सोनू लंबे समय से झारखंड की राजनीति में सक्रिय रहे और संगठन से लेकर सरकार तक उन्होंने अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाईं। उनके निधन को झामुमो और राज्य सरकार के लिए एक बड़ी राजनीतिक क्षति के रूप में देखा जा रहा है। उनके समर्थकों और करीबी लोगों के बीच शोक का माहौल है।

sawad sansar

सुदिव्य सोनू के निधन के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धांजलि संदेश सामने आए। राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं के अलावा सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने उनके साथ अपने अनुभव साझा किए। कई लोगों ने उन्हें जमीनी राजनीति से जुड़े रहने वाला नेता बताते हुए उनके मिलनसार स्वभाव और सक्रिय राजनीतिक भूमिका को याद किया।

गिरिडीह में उनके निधन का असर विशेष रूप से देखने को मिला। उनके राजनीतिक जीवन का बड़ा हिस्सा गिरिडीह से जुड़ा रहा। यही वजह है कि स्थानीय लोगों और समर्थकों के बीच उनके निधन को लेकर गहरा भावनात्मक शोक देखने को मिला।

राज्य में श्रद्धांजलियों का सिलसिला, राष्ट्रीय स्तर पर चुप्पी चर्चा में

एक ओर जहां झारखंड के विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की ओर से लगातार शोक संवेदनाएं व्यक्त की जा रही हैं, वहीं राष्ट्रीय स्तर के कुछ प्रमुख नेताओं की ओर से सार्वजनिक श्रद्धांजलि संदेश सामने नहीं आने को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राजद नेता तेजस्वी यादव जैसे राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख चेहरों की ओर से सार्वजनिक सोशल मीडिया पोस्ट नहीं दिखने की बात चर्चा में है।

हालांकि, किसी नेता की ओर से सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं किया जाना उनकी व्यक्तिगत संवेदना या प्रतिक्रिया का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। यह भी संभव है कि किसी नेता ने व्यक्तिगत स्तर पर संवेदना व्यक्त की हो या सार्वजनिक मंच का इस्तेमाल नहीं किया हो। इसके बावजूद राज्य सरकार के एक मंत्री और सक्रिय राजनीतिक चेहरे के निधन के बाद राष्ट्रीय स्तर पर कुछ प्रमुख नेताओं की सार्वजनिक चुप्पी राजनीतिक चर्चा का विषय जरूर बन गई है।

निशिकांत दुबे की चुप्पी पर भी उठ रहे सवाल

इसी क्रम में गोड्डा के भाजपा सांसद निशिकांत दुबे का नाम भी चर्चा में आया है। झारखंड की राजनीति में गिरिडीह, देवघर और गोड्डा सहित आसपास का क्षेत्र राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में सुदिव्य कुमार सोनू के निधन पर उनकी ओर से सार्वजनिक श्रद्धांजलि संदेश को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा हो रही है।

हालांकि, किसी नेता की ओर से सार्वजनिक बयान नहीं आने के पीछे व्यक्तिगत, राजनीतिक या अन्य कई कारण हो सकते हैं। इसलिए केवल सार्वजनिक पोस्ट के आधार पर किसी नेता की संवेदनशीलता या व्यक्तिगत भावना पर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

राजनीतिक मतभेदों से ऊपर होती हैं मानवीय संवेदनाएं

सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद एक बड़ा सवाल भी राजनीतिक और सामाजिक चर्चा के केंद्र में आ गया है क्या किसी जनप्रतिनिधि या सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्ति के निधन पर राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर मानवीय संवेदना व्यक्त की जानी चाहिए?

राजनीति में विचारधाराओं और नीतियों को लेकर मतभेद स्वाभाविक हैं। अलग-अलग दलों के नेता एक-दूसरे के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी भी होते हैं। लेकिन किसी जनप्रतिनिधि के निधन के बाद शोक व्यक्त करना मानवीय और लोकतांत्रिक परंपरा का हिस्सा माना जाता रहा है। यही वजह है कि सुदिव्य सोनू के निधन के बाद राष्ट्रीय स्तर के कुछ नेताओं की सार्वजनिक चुप्पी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।हालाँकि झारखण्ड प्रदेश के प्रायः सभी दलों के बड़े नेताओं ने ना सिर्फ सोशल मीडिया पर अपनी शोक संवेदना प्रकट की, बल्कि कई तो समाचार सुनते ही उनके अंतिम दर्शन के लिए गिरिडीह आए और परिजनों से मिल कर उन्हें ढाढ़स बंधाया।

सुदिव्य कुमार सोनू राज्य सरकार में मंत्री होने के साथ झामुमो के सक्रिय और वरिष्ठ नेताओं में शामिल रहे।

ऐसे में उनके निधन के बाद कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व की सार्वजनिक प्रतिक्रिया को लेकर भी राजनीतिक हलकों में निगाहें बनी हुई हैं। हालांकि, शोक संवेदना का सार्वजनिक रूप से सोशल मीडिया पर दिखाई देना ही एकमात्र पैमाना नहीं हो सकता, लेकिन गठबंधन की राजनीति के संदर्भ में ऐसी प्रतिक्रिया का अपना राजनीतिक और प्रतीकात्मक महत्व जरूर होता है।

सुदिव्य सोनू की राजनीतिक विरासत पर भी चर्चा

सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद उनके राजनीतिक सफर और झारखंड की राजनीति में उनकी भूमिका को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। कार्यकर्ताओं के बीच उनकी संगठनात्मक सक्रियता, जमीनी जुड़ाव और राजनीतिक संघर्षों से जुड़े प्रसंग याद किए जा रहे हैं।

उनके समर्थकों का कहना है कि सुदिव्य सोनू केवल एक मंत्री या विधायक के रूप में नहीं, बल्कि लंबे समय तक संगठन और क्षेत्र की राजनीति से जुड़े कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय रहे। उनके अचानक चले जाने से झामुमो संगठन और गिरिडीह की राजनीति में एक बड़ा रिक्त स्थान पैदा हुआ है।

आने वाले दिनों में सामने आ सकती है और प्रतिक्रिया

फिलहाल सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद झारखंड में शोक और श्रद्धांजलियों का दौर जारी है। राष्ट्रीय स्तर पर जिन नेताओं की सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, उसे लेकर चर्चा भी जारी है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में इन नेताओं या राजनीतिक दलों की ओर से कोई औपचारिक शोक संदेश सामने आता है या नहीं।

फिलहाल इतना जरूर है कि सुदिव्य कुमार सोनू के असामयिक निधन ने झारखंड की राजनीति को झकझोर दिया है और उनके राजनीतिक जीवन, योगदान तथा उनके साथ जुड़े लोगों की यादें लंबे समय तक चर्चा में रहेंगी।

ITI
Leave A Reply

Your email address will not be published.