Nav Bihan
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गिरिडीह उपचुनाव की आहट से बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी, भाजपा में टिकट के लिए फिर बढ़ी होड़

झामुमो से दिवगंत मंत्री सुदिव्य कुमार की पत्नी श्वेता शर्मा का नाम लगभग तय, भाजपा में पूर्व विधायक से लेकर नए चेहरे तक ठोक रहे दावेदारी, जेएलकेएम ने भी बढ़ाई सक्रियता

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रिंकेश कुमार गिरिडीह। दिवंगत मंत्री सह गिरिडीह के सदर विधायक सुदिव्य कुमार के निधन के बाद गिरिडीह विधानसभा सीट पर संभावित उपचुनाव ने गिरिडीह के राजनीतिक गालियारे में हलचल तेज कर दी है। चुनाव की आधिकारिक घोषणा भले अभी बाकी हो, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। झामुमो जहां दिवंगत मंत्री सुदिव्य कुमार के निधन के बाद ही चुनावी मोड में आ चुकी है, वहीं भाजपा और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) भी लगातार अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटे हैं।

श्वेता शर्मा पर झामुमो को भरोसा

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माना जा रहा है कि मंत्री सुदिव्य कुमार के निधन के बाद झामुमो की ओर से उनकी पत्नी श्वेता शर्मा ही प्रत्याशी होगी। पार्टी के अंदर और समर्थकों के बीच भी उन्हें संभावित प्रत्याशी के तौर पर ही देखा जा रहा है। ऐसे में यदि झामुमो श्वेता शर्मा को मैदान में उतारता है तो चुनाव में दिवंगत विधायक की विरासत और सहानुभूति का मुद्दा भी अहम भूमिका निभा सकता है।

भाजपा में टिकट के लिए कई दावेदार

दूसरी ओर भाजपा में संभावित प्रत्याशी को लेकर तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं है। पार्टी के कई पुराने और नए चेहरे अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं। सोशल मीडिया से लेकर पार्टी के कार्यक्रमों तक संभावित उम्मीदवार अपनी सक्रियता दिखा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर चलाए जा रहे सेवा संकल्प अभियान में भी भाजपा के कई संभावित दावेदार पूरी तरह से सक्रिय नजर आ रहे हैं। राजनीतिक जानकार इसे महज संगठनात्मक सक्रियता के बजाय आगामी उपचुनाव की तैयारियों से जोड़कर भी देख रहे हैं।

पूर्व विधायक से लेकर नए चेहरों तक की नजर

भाजपा के संभावित दावेदारों में पूर्व विधायक निर्भय शाहाबादी का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। इसके अलावा पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष दिनेश यादव, सुरेश साव, चुन्नूकांत, विनोद कुमार, विभाकर पांडेय  और प्रो. विनिता समेत कई नाम चर्चा में हैं। वहीं पीरटांड़ क्षेत्र से उठ रही मांग के बीच मनोज साहू भी चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में बताए जा रहे हैं। पार्टी के भीतर दावेदारों की बढ़ती सक्रियता से साफ है कि टिकट की दौड़ इस बार भी आसान नहीं रहने वाली है।

सोशल मीडिया बना दावेदारी का नया मंच

गिरिडीह उपचुनाव की चर्चा के साथ ही भाजपा के कई संभावित प्रत्याशी सोशल मीडिया पर भी अपनी सक्रियता बढ़ा रहे हैं। क्षेत्र में किए जा रहे कार्यक्रमों, जनसंपर्क और संगठनात्मक गतिविधियों को प्रमुखता से प्रचारित किया जा रहा है। इससे टिकट की दावेदारी को लेकर पार्टी के अंदर बढ़ती प्रतिस्पर्धा का अंदाजा भी लगाया जा सकता है।

चुनाव की घोषणा के बाद खुलेगा पत्ता

हालांकि भाजपा की ओर से अभी किसी भी नाम पर आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व को ही करना है। ऐसे में टिकट के दावेदारों की संख्या आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है। फिलहाल गिरिडीह की सियासत में सबसे बड़ा सवाल यही है कि झामुमो सुदिव्य कुमार की राजनीतिक विरासत किसके हाथों में सौंपता है और भाजपा पुराने चेहरे पर दांव लगाती है या किसी नए चेहरे को मैदान में उतारकर मुकाबले को नया मोड़ देती है। उपचुनाव की घोषणा के साथ ही इन सवालों के जवाब मिलने शुरू हो जाएंगे और गिरिडीह की सियासी तस्वीर भी स्पष्ट होने लगेगी।

ITI
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