एलआईसी को कमजोर करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं करेगा संघ रू धर्म प्रकाश
अखिल भारतीय बीमा कर्मचारी संघ का 76वां स्थापना दिवस मनाया गया, 500 से अधिक लोगों के बीच सत्तू-शर्बत का वितरण

गिरिडीह। एलआईसी गिरिडीह शाखा कार्यालय में बुधवार को अखिल भारतीय बीमा कर्मचारी संघ (एआईआईईए) का 76वां स्थापना दिवस समारोह उत्साह और गरिमा के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत संघ की उपाध्यक्ष कुमकुम बाला वर्मा द्वारा ध्वजारोहण के साथ हुई, जबकि कार्यक्रम का संचालन मंडलीय सांगठनिक सचिव अनुराग मुर्मू ने किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संघ के सचिव धर्म प्रकाश ने कहा कि अखिल भारतीय बीमा कर्मचारी संघ की स्थापना 1 जुलाई 1951 को हुई थी। स्थापना के बाद से ही संघ ने बीमा क्षेत्र के राष्ट्रीयकरण की मांग को लेकर लगातार संघर्ष किया, जिसके परिणामस्वरूप देश की लगभग 250 निजी बीमा कंपनियों का राष्ट्रीयकरण किया गया और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की स्थापना हुई।


उन्होंने कहा कि मात्र पांच करोड़ रुपये की पूंजी से शुरू हुई एलआईसी आज 55 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परिसंपत्तियों वाली देश की सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय संस्थाओं में शामिल है। देश के आधारभूत ढांचे के विकास में एलआईसी द्वारा 44 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जा चुका है, जिससे यह देश की आर्थिक रीढ़ के रूप में स्थापित हुई है।

धर्म प्रकाश ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा पहले एलआईसी के 3.50 प्रतिशत शेयरों का विनिवेश किया गया और अब पुनः सात प्रतिशत शेयरों के विनिवेश की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह कदम निगम को कमजोर करने तथा निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाने की दिशा में उठाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की निगम विरोधी नीतियों के खिलाफ संघ आंदोलन करेगा।
स्थापना दिवस के अवसर पर एलआईसी शाखा कार्यालय परिसर में सत्तू-शर्बत वितरण कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया, जिसमें 500 से अधिक लोगों ने भाग लिया और शर्बत ग्रहण किया।
कार्यक्रम में पेंशनर संघ के लक्ष्मी नारायण गुप्ता, संहिता सरकार एवं डेनियल मरांडी सहित बीमा कर्मचारी संघ के अनुराग मुर्मू, कुमकुम बाला वर्मा, विजय कुमार, राजेश कुमार उपाध्याय, उमानाथ झा, रोशन कुमार, सुनील कुमार वर्मा, विनय कुमार, अंशु सिंघानिया, सबा प्रवीण, प्रदीप कुमार, अभय कुमार, मो. महफूज अली, कुलजीत कुमार, देवनाथ दास, प्रभाष कुमार, संजय कुमार शर्मा, प्रदीप प्रसाद और घनश्याम साव समेत बड़ी संख्या में सदस्य उपस्थित थे।

