Nav Bihan
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हाईकोर्ट से जमानत मिली, जेल से निकलते ही फिर गिरफ्तारी! एक ही घटना के दो केसों पर उठे बड़े सवाल

गिरिडीह में पुलिस कार्रवाई पर विवाद, परिजनों और अधिवक्ता ने लगाए गंभीर आरोप

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गिरिडीह। नगर निगम चुनाव के दौरान हुए चर्चित आजाद नगर गोलीकांड मामले में एक नया मोड़ सामने आया है। उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के बाद जेल से बाहर निकले चार आरोपियों को पचंबा पुलिस ने दूसरे मामले में फिर से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इस कार्रवाई के बाद पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। परिजनों ने इसे साजिश करार दिया है, जबकि बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने भी पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाया है।

जमानत के बाद मिली आजादी, लेकिन जेल के बाहर ही हुई दोबारा गिरफ्तारी

sawad sansar

मृतक पक्ष की शिकायत पर दर्ज पचंबा थाना कांड संख्या 16/26 में अमित विश्वकर्मा, मनजीत पासवान, किशोर कुमार और आकाश हांडी को उच्च न्यायालय से जमानत मिल चुकी थी। गुरुवार शाम जब चारों जेल से बाहर निकले, तभी पुलिस ने उन्हें दूसरे मामले यानी पचंबा थाना कांड संख्या 15/26 में पूछताछ और रिमांड के नाम पर हिरासत में ले लिया। शुक्रवार को चारों आरोपियों को सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें पुनः न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

कोर्ट में उठा पुलिस की कार्यप्रणाली का मुद्दा

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता अजय कुमार सिन्हा ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने अदालत को बताया कि जिन आरोपियों को हाईकोर्ट से राहत मिली, उन्हें जेल से निकलते ही दूसरे केस में गिरफ्तार कर लिया गया। अधिवक्ता का कहना था कि यह पूरी कार्रवाई संदेह पैदा करती है और इससे पुलिस की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगते हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने अनुसंधानकर्ता (आईओ) से जवाब तलब किया है।

परिजनों का आरोप : पुलिस दबाव और प्रभाव में कर रही है काम

चारों आरोपियों के परिजनों ने कोर्ट परिसर में विरोध जताया और पुलिस पर पक्षपातपूर्ण कार्रवाई का आरोप लगाया। परिजनों का कहना है कि दोनों मामलों के अनुसंधानकर्ता एक ही अधिकारी प्रशांत सिंह हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि 104 दिन बीत जाने के बाद भी एक मामले में चार्जशीट क्यों दाखिल नहीं की गई, जबकि दूसरे मामले में कार्रवाई आगे बढ़ा दी गई। परिजनों ने इसे पुलिस की मनमानी बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

अधिवक्ता का दावा : एक ही घटना में दो ट्रायल की स्थिति बन रही है

बचाव पक्ष के अधिवक्ता अजय सिन्हा मंटू ने कहा कि आजाद नगर हिंसा और गोलीकांड एक ही घटना का हिस्सा है। ऐसे में दो अलग-अलग मामलों में कार्रवाई कर आरोपियों को बार-बार गिरफ्तार करना न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने कहा कि घटना के दौरान दोनों पक्षों के बीच पथराव और हिंसा हुई थी। गोली किसने चलाई, यह अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। इसके बावजूद पुलिस की कार्रवाई एकतरफा दिखाई दे रही है।

क्या है पूरा मामला?

नगर निगम चुनाव के दौरान वार्ड नंबर 18 में कथित बोगस मतदान को लेकर झामुमो समर्थक राजू खान और शिवम आजाद उर्फ शिवम श्रीवास्तव के समर्थकों के बीच विवाद शुरू हुआ था। शाम होते-होते यह विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। पचंबा थाना क्षेत्र के आजाद नगर में पथराव और गोलीबारी की घटना हुई, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई। मृतक के परिजनों ने शिवम आजाद और उनके समर्थकों पर गोली चलाने का आरोप लगाया था। इसके आधार पर पचंबा थाना कांड संख्या 16/26 दर्ज हुआ और पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कई लोगों को गिरफ्तार किया।

दूसरी ओर, इससे पहले सदर प्रखंड के एमओ के आवेदन पर पचंबा थाना कांड संख्या 15/26 भी दर्ज किया गया था, जिसमें शिवम आजाद और अन्य अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया था। आजाद नगर गोलीकांड से जुड़े इस घटनाक्रम ने पुलिस जांच और कानूनी प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ पुलिस अपनी कार्रवाई को कानून सम्मत बता रही है, वहीं दूसरी ओर परिजन और बचाव पक्ष इसे साजिश और दबाव में की गई कार्रवाई बता रहे हैं। अब सभी की नजर अदालत और अनुसंधानकर्ता के जवाब पर टिकी है, जिससे इस पूरे विवाद की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।

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