बिना नक्शा निर्माण और आम रास्ते पर सेप्टिक टैंक बनाने का आरोप, आरोपी ने कहा- जमीन पुश्तैनी, आरोप निराधार
पचंबा वार्ड नंबर-1 का मामला, नगर निगम में की गई शिकायत; कृष्ण बगड़िया ने कहा- जमीन के मालिकाना हक के दस्तावेज मौजूद

गिरिडीह/पचम्बा : पचम्बा के वार्ड नंबर-1 में बिना नक्शा पास कराए निर्माण और आम रास्ते पर सेप्टिक टैंक बनाए जाने के आरोप को लेकर शिकायत सामने आई है। स्थानीय निवासी प्रभात कुमार बगड़िया ने नगर निगम के आयुक्त को आवेदन देकर मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत के अनुसार, कृष्ण कुमार बगड़िया पर बिना नक्शा पास कराए निर्माण करने, बिना अनुमति बोरिंग कराने तथा आम रास्ते पर सेप्टिक टैंक बनाए जाने का आरोप लगाया गया है। आवेदन में कहा गया है कि पचम्बा के कठगोला रोड स्थित एक आवास का सेप्टिक टैंक जिस रास्ते पर बनाया गया है, उसका इस्तेमाल वर्षों से आम लोगों के आवागमन के लिए होता रहा है। शिकायतकर्ता ने बताया है कि इसी रास्ते से नर्मदा मंदिर, रानी सती मंदिर और जामा मस्जिद जाने वाले श्रद्धालु भी गुजरते हैं। उन्होंने नगर निगम से मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की है।


नगर आयुक्त ने कहा- आम रास्ते पर निर्माण गैरकानूनी
शिकायत के संबंध में नगर आयुक्त विजय सिंह बिरुआ ने कहा कि आम रास्ते पर सेप्टिक टैंक का निर्माण करना गैरकानूनी है। नक्शा पास नहीं होने का आरोप भी लगाया गया है। उन्होंने मामले की शीघ्र जांच कर नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की बात कही है।
कृष्ण बगड़िया ने आरोपों को बताया झूठा
इधर, कृष्ण बगड़िया ने ‘नव बिहान’ से बातचीत में शिकायत में लगाए गए आरोपों को पूरी तरह गलत बताया। उन्होंने कहा कि जिस जमीन पर सेप्टिक टैंक निर्माण की बात कही जा रही है, वह कोई आम रास्ता नहीं बल्कि उनके परिवार की पुश्तैनी जमीन है।
कृष्ण बगड़िया के अनुसार, आपसी घरेलू बंटवारे के बाद उक्त जमीन उनके भाई निर्मल बगड़िया के हिस्से में आई है और सेप्टिक टैंक का निर्माण भी उनके भाई ने ही कराया है। उन्होंने दावा किया कि जमीन के मालिकाना हक से संबंधित सभी आवश्यक कागजात उनके और उनके भाई के पास मौजूद हैं।
कृष्ण बगड़िया ने शिकायतकर्ताओं पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि उनकी नजर उनके घर और जमीन पर है तथा झूठे आरोप लगाकर उन्हें ब्लैकमेल करने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
फिलहाल मामले में शिकायत और दोनों पक्षों के दावों के बीच जमीन के स्वामित्व, रास्ते की स्थिति और निर्माण की वैधता की जांच महत्वपूर्ण होगी। नगर निगम की जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

