ईडी की रेड के बाद बढ़ी काले धंधे के किंगपिन की हैसियत, कोयला और बालू तस्करों का बड़ा साम्राज्य बना संथाल परगना
महज फोरमिलिटी भर रहे गई है जिला टास्क फोर्स कमेटियों की रूटीन बैठकें, छोटी मोटी कार्रवाइयों की खानापूर्ति कर सरकार की आंखों में धूल झोंक रहे हैं संबंधित अधिकारी

जामताड़ा। संथाल परगना इन दिनों बालू और कोयले के काले धंधेबाजों का साम्राज्य बन गया है। पूरे गौरखधंधे का किंगपिन हाल ही में ईडी की रेड से गुजर चुका है। रेड के वक्त अपने ठिकाने से भाग निकले तस्करों की हैसियत में बाद के दिनों में और भी इजाफा हो गया है। अब उनके जारी पैड पर कोयला और बालू लोड ट्रक संथाल परगना क्षेत्र से सरपट बिहार और पश्चिम बंगाल की मंडियों तक की दौड़ लगा रहे है। इसे कोई रोकने वाला कोई नहीं है। आलम यह है कि राज्य सरकार की सख्ती के बावजूद क्षेत्र के जिलों की टास्क फोर्स कमेटियों की बैठकें महज कर्मकांड बनकर रह गई हैं।
बंद पड़े ईसीएल की खदान हैं सॉफ्ट टारगेट


जामताड़ा जिले के नाला में ईसीएल के बंद पड़े कास्ता, पलास्थली, खड़ीमाटी, जोरकुड़ी आदि खदानों से उत्खनन कर डंपिंग का कारोबार ईडी रेड वाले मंडल की सरपरस्ती में किया जा रहा है। यहां 24 घंटे घंधेबाज हरकत में रहते हैं। साथ ही शाम होते ही करीब 60-70 ट्रक कोयला वाया दुमका बिहार और पश्चिम बंगाल के लिए रवाना कर दिया जाता है। सूत्रों के अनुसार मंडल के जारी पैड पर जगह-जगह पासिंग दी जाती है। कोयले के ट्रक के लिए पैड के नाम पर 1.30 लाख रुपये की वसूली की जाती है। अवैध उत्खनन इस इलाके में इस कदर जारी है कि ईसीएल के हिस्से वाला खरबों रुपयों का कोल रिजर्व बंद खदानों की छाती खोखली कर निकाला जाता है। दूसरी ओर आसपास के और भी कई इलाकों व जिलों में पड़ने वाली नदियों से 300 ट्रक बालू भी पैड लेकर इसी रास्ते से पश्चिम बंगाल और बिहार के लिए रवाना होता है और वहां इसे खपाया जाता है।
तय है रसूखदारों के लिए नजराना
इस पूरे खेल में कमोबेश सभी ओहदेदारों का नजराना मंथली या प्रत्येक गाड़ी के हिसाब से बंधा हुआ है। इस धंधे से पक्ष हो या विपक्ष या किसी पार्टी को कोई आपत्ति नहीं होता। खाकी से लेकर खादी और प्रेस तक के नाम का नजराना बंधा हुआ है। नाला में उत्तम महतो इस पूरे गौरखधंधे में अमर मंडल के साथ है। अफसर और नेताओं तक पैसे वही पहुंचाता है। उत्तम महतो और अमर मंडल को देर शाम तक नाला एसडीपीओ कार्यालय में देखा जा सकता है।
डीओ पेपर के कोयले से भी वसूली
ईडी की रेड से गुजर चुके तस्कर की धाक इस कदर बढ़ी है कि उसके इशारे पर चितरा कोलियरी से निकले वैध धंधे यानी डीओ पेपर वाले कोयला लोड वाहनों को परेशान किया जाता है। इन गाड़ियों को जांच के बहाने जगह-जगह रोक कर वसूली की जाती है। ऐसे में वैध धंधेबाजों की कमाई घटी है। ऊपर से कोयले की कीमतों में गिरावट उनपर पहले से बुरा असर डाल रही है। साथ ही डीओ पेपर पर कोयला कारोबार में मंदी से ईसीएल के राजस्व पर भी बुरा असर पड़ा है।
अंडरग्राउंड कोल गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट को नुकसान
कागजों पर ही जामताड़ा में शुरू किये गये अंडरग्राउंड कोल गैसीफिकेशन के पायलट प्रोजेक्ट के पूरी तरह धरातल पर नहीं उतरने की वजह भी नाला क्षेत्र में ईसीएल के बंद पड़े खदानों से कोयले का बेरोकटोक अवैध उत्खनन है। वरना, इस पायलट प्रोजेक्ट की सफलता से देश में कोयला के इस्तेमाल और ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त होता। इस परियोजना के तहत खदान में कोयले से कई तरह की गैसों का उत्पादन होना प्रस्तावित था। इन गैसों का अलग-अलग उद्योगों में इस्तेमाल होता है। ईसीएल ने सीएमपीडीआई रांची और कनाडा की एक कंपनी के साथ मिलकर इस परियोजना की शुरुआत की थी, लेकिन यह प्रोजैक्ट अबतक आकार नहीं ले पाया है।
