सदर अस्पताल में रक्त उपलब्ध कराने में पैसे मांगने का आरोप
रक्त चढ़ाने के बाद मरीज की तबियत बिगड़ने का दावा, अभाविप ने सिविल सर्जन से जांच व कार्रवाई की मांग की

गिरिडीह : गिरिडीह सदर अस्पताल की रक्त प्रबंधन व्यवस्था को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। एक मरीज के परिजनों ने अस्पताल के संबंधित कर्मचारियों पर रक्त उपलब्ध कराने के एवज में पैसे मांगने का आरोप लगाया है। परिजनों का यह भी दावा है कि कथित रूप से किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर उपलब्ध कराए गए रक्त को मरीज को चढ़ाए जाने के दौरान उसकी स्थिति बिगड़ गई। मामले को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने सिविल सर्जन को ज्ञापन सौंपकर जांच एवं दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
12 सितंबर को रक्त लेने पहुंचा था परिजन


बताया जाता है कि 12 सितंबर को एक व्यक्ति अपने परिजन के लिए रक्त उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सदर अस्पताल परिसर स्थित रक्त अधिकोष पहुंचा था। आरोप है कि अस्पताल के संबंधित कर्मचारियों द्वारा रक्त उपलब्ध कराने के एवज में उससे पैसे की मांग की गई।
दूसरे व्यक्ति के नाम पर उपलब्ध रक्त देने का आरोप
परिजनों का आरोप है कि पैसे की मांग के बाद कथित तौर पर किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर उपलब्ध रक्त मरीज को चढ़ाया गया। इस पूरे मामले ने रक्त अधिकोष में रक्त के आवंटन और रिकॉर्ड संधारण की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रक्त चढ़ाने के दौरान बिगड़ी मरीज की तबियत
परिजनों के अनुसार, मरीज को उक्त रक्त चढ़ाए जाने के दौरान उसकी तबियत अचानक बिगड़ने लगी। हालांकि, मरीज की स्थिति बिगड़ने के वास्तविक कारणों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मामले की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
रक्त की जांच और क्रॉस-मैचिंग पर उठे सवाल
अभाविप ने मामले की जांच कर यह स्पष्ट करने की मांग की है कि मरीज को किस रक्त समूह का रक्त उपलब्ध कराया गया था। रक्त की जांच और क्रॉस-मैचिंग की प्रक्रिया नियमानुसार हुई थी या नहीं और रक्त चढ़ाने के दौरान मरीज की तबीयत बिगड़ने के पीछे वास्तविक कारण क्या था, इसकी भी जांच की मांग की गई है।
अभाविप ने सिविल सर्जन को सौंपा ज्ञापन
मामले को लेकर अभाविप के प्रदेश एसएफएस सह संयोजक अनीश रॉय, कॉलेज उपाध्यक्ष मुन्ना पंडित, आकाश श्रीवास्तव, जय सिंह, सनी सिंह, हेमंत वर्मा और गौतम मिश्रा ने सिविल सर्जन को ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि रक्त जैसी जीवनरक्षक सुविधा उपलब्ध कराने के नाम पर आर्थिक लेन-देन का आरोप बेहद गंभीर है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
व्यवस्था में सुधार की मांग
अभाविप ने सदर अस्पताल के रक्त अधिकोष की कार्यप्रणाली की समीक्षा करने तथा रक्त उपलब्ध कराने की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की मांग की। संगठन ने मरीजों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही।
कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
अभाविप ने अस्पताल प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि मामले में शीघ्र एवं उचित कार्रवाई नहीं की गई और अस्पताल की व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो संगठन लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा। इसकी जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन की होगी।
हालांकि, लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। पूरे मामले में अस्पताल प्रशासन की जांच और आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

