शहर के साथ-साथ गांडेय के डांडीघुटु में भीषण पेयजल संकट से जूझ रहे लोग गंदा पानी पीने को मजबूर है डांडीघुटु के ग्रामीण, सरकारी योजनाएं बनी ‘सफेद हाथी’
डबल इंजन की सरकार और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन से लोगों को उम्मीद

गिरिडीह। गर्मी की शुरूआत होते ही शहरी क्षेत्र के अलावे जिले के विभिन्न इलाकों में पेयजल समस्या विकराल रूप धारण करने लगी है। आलम यह है कि मौसम का तापमान के चढने के साथ ही जहां विभिन्न जलस्त्रोत के पानी का लेयर नीचे जाने लगा है। वहीं शहर के न्यू बरगंडा, बरगंडा, करबला रोड, पंजाबी मुहल्ला, मकतपुर, स्टेशन रोड, बरवाडीह, बोड़ो सहित कई मुहल्लों में बीते तीन चार दिनों से पेयजलापूर्ति बाधित है। चापाकल पर भी लोगों की भीड़ लग रही है। जिसके कारण लोगों को काफी फजिहत का सामना करना पड़ रहा है। यहां तक कि लोगों के द्वारा सोशल मीडिया पर भी पानी समस्या को ट्रोल किया जा रहा है। इस बीच वार्ड नंबर 6 के पार्षद सह भाजपा नेता संजीव कुमार ने अपने वार्ड सहित शहर के कई इलाकों में पानी की समस्या को देखते हुए नगर प्रशासन पर सवाल उठाते हुए शीघ्र समाधान नही होने पर सड़क पर उतरकर आंदोलन तक की चेतावनी दे दी है।
इधर गांडेय विधानसभा क्षेत्र के जीतपुर पंचायत के दुर्गापहरी ग्राम का टोला डांडीघुटु इन दिनों भीषण जल संकट से जूझ रहा है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि यहां के करीब 40 घरों के लोग गंदे डाड़ी (तालाबनुमा जल स्रोत) का पानी पीने को मजबूर हैं। विडंबना यह है कि इस जल स्त्रोत में जानवर और इंसान एक साथ पानी पी रहे है, जिससे ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। टोले में सरकार द्वारा सिर्फ एक कुआं उपलब्ध कराया गया था, जो अब पूरी तरह सूख चुका है। पानी के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने के कारण लोगों के पास डाड़ी का गंदा पानी पीने के अलावे कोई चारा नही है


टोले में रहने वाली कुंती मुर्मू, मुकेश हेंब्रम, सुखु हेमब्रम का कहना है कि उनके गांव में वर्षों से पानी की समस्या बनी हुई है, लेकिन आज तक कोई जनप्रतिनिधि हाल जानने तक नहीं पहुंचा। कई बार स्थानीय मुखिया को शिकायत की गई, मगर समस्या जस की तस बनी हुई है। कहा कि पानी की गंभीर समस्या के कारण लोग यहां रिश्ता करने से भी कतराते हैं। कहा कि वर्ष 2021-22 में एकल ग्राम जलपूर्ति योजना के तहत यहां एक पानी टंकी का निर्माण कराया गया था, लेकिन आज तक उस टंकी से एक बूंद भी पानी ग्रामीणों को नसीब नहीं हुआ। करोड़ों की योजनाएं कागजों तक सीमित रह गई हैं, जबकि जमीनी हकीकत बेहद भयावह है।
क्षेत्र में पेयजलापूर्ति को लेकर उत्पन्न भयावह स्थिति को देखते हुए जहां शहर के लोग शहर की डबल इंजन की सरकार से आस लगाए बैठी है। वहीं टोला डांडीघुटु के आदिवासी समुदाय के ग्रामीण गांडेय विधायक कल्पना सोरेन की ओर उम्मीद भरी नजरो से देख रहे है। अब ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि शहरी क्षेत्र में डबल इंजन की सरकार और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन अपने क्षेत्र की जनता को भीषण पेयजल संकट से उबार पायेगी या उन्हें भगवान भरोसे ही जीना पड़ेगा।
