थाने में युवक की कथित पिटाई का वीडियो वायरल, तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती
पुलिस पर बेरहमी से मारपीट का आरोप, भाजपा नेता विनय सिंह और दिनेश यादव ने की कार्रवाई की मांग

गिरिडीह : नगर थाना में 25 वर्षीय लखन साव के साथ कथित मारपीट का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। युवक के शरीर पर चोट और थाना परिसर में तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल पहुंचाए जाने की घटना ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि पुलिस ने युवक और उसके परिजनों के आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए पूरे मामले को नशे की हालत में किए गए हंगामे से जोड़ दिया है।
लखन साव का आरोप है कि वह अपने कुछ दोस्तों के साथ ऑर्बिट होटल के पास खड़ा था। इसी दौरान पुलिस वहां पहुंची और उसके साथ मारपीट की गई। आरोप है कि पुलिस उसकी बाइक भी उठाकर नगर थाना ले गई। इसके बाद जब लखन अपनी बाइक लेने थाना पहुंचा तो वहां भी उसके साथ कथित तौर पर मारपीट की गई।


युवक के मुताबिक, मारपीट के बाद उसकी हालत अचानक बिगड़ गई और वह थाना परिसर में ही गिर पड़ा। इसके बाद पुलिस उसे इलाज के लिए सदर अस्पताल लेकर पहुंची, जहां उसे भर्ती कराया गया।
परिजनों ने लगाया गंभीर आरोप, कार्रवाई की मांग
घटना की जानकारी मिलने के बाद लखन की परिजन भी नगर थाना पहुंचे। उन्होंने पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
परिजनों का सवाल है कि यदि युवक ने थाने में सिर्फ हंगामा किया था, तो उसकी तबीयत थाना परिसर में अचानक क्यों बिगड़ी, आखिर ऐसी कौन-सी परिस्थिति बनी कि पुलिस को उसे अस्पताल ले जाना पड़ा
परिजनों और स्थानीय लोगों के अनुसार, मारपीट के बाद युवक की तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद उसे पुलिस ने ही आनन-फ़ानन में इलाज के लिए गिरिडीह सदर अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसका इलाज चल रहा है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि युवक की पिटाई से आक्रोशित परिजन थाने में हंगामा कर रहे हैं, जबकि पुलिसकर्मी अपनी चमड़ी बचाने के लिए घायल युवक को जैसे-तैसे गाड़ी में बिठा कर अस्पताल ले जाने का प्रयास कर रहे हैं.
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों में पुलिस की कार्यशैली को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का सवाल है कि अगर किसी व्यक्ति से पूछताछ या कार्रवाई जरूरी थी, तो क्या कानून के दायरे में रहते हुए प्रक्रिया का पालन नहीं किया जाना चाहिए था?
मामले को लेकर भाजपा नेता विनय सिंह और दिनेश यादव ने भी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने घटना की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
पुलिस का पलटवार,नशे में थे युवक, खुद किया हंगामा
इधर नगर थाना प्रभारी रतन कुमार सिंह ने युवक के आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया है। पुलिस के अनुसार, लखन और उसके साथी नशे का सेवन कर रहे थे। पुलिस को देखते ही वे वहां से भागने लगे और इसी दौरान बाइक व मोबाइल मौके पर छूट गए।
थाना प्रभारी का दावा है कि बाद में युवक अपने साथियों के साथ थाना पहुंचा और वहां हंगामा करने लगा। पुलिस का कहना है कि युवक डेंड्राइट के नशे में था और उसकी हालत सामान्य नहीं थी। थाना प्रभारी ने किसी भी पुलिसकर्मी द्वारा मारपीट किए जाने से इनकार किया है।
आरोप गंभीर, पुलिस का जवाब भी सवालों के घेरे में
अब पूरा मामला युवक के आरोप और पुलिस के दावे के बीच उलझ गया है। युवक और उसके परिजन पुलिस पर मारपीट का आरोप लगा रहे हैं, जबकि पुलिस युवक की नशे की हालत और हंगामे को घटना की वजह बता रही है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि थाना परिसर में आखिर हुआ क्या था. युवक की तबीयत क्यों बिगड़ी, क्या उसके साथ वास्तव में मारपीट हुई या फिर पुलिस के दावे के मुताबिक नशे की हालत में उसने खुद हंगामा किया। हालांकि वायरल वीडियो पर भरोसा करें तो ये कुछ और ही कहानी बयान कर रहा है। वायरल वीडियो देख कर तो यही कहा जा सकता है कि युवक के साथ थाना के अंदर मार-पीट हुई है, वजह चाहे जो भी रही हो।
इन सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच, मेडिकल रिपोर्ट, थाना परिसर में मौजूद लोगों के बयान और यदि उपलब्ध हो तो सीसीटीवी फुटेज से ही सामने आ सकता है। फिलहाल मामला आरोप-प्रत्यारोप के बीच है, लेकिन थाना परिसर में मार-पीट और युवक के अस्पताल पहुंचने की घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

