नही सुधर रही सदर अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्था, छात्रा को चढ़ाया गया बग़ैर रैपर लगा स्लाइन, बिगड़ी तबियत
परिजनों ने अस्पताल में किया हंगामा, अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सक पर लगाया लापरवाही का आरोप

गिरिडीह। एक ओर जहां झारखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी स्वास्थ्य व्यवस्था के बेहतर बनाने के बड़े बड़े दावे कर रहे हो, लेकिन राज्य के विभिन्न जिलो में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था सुधरने का नाम नही ले रहा है। आये दिन किसी न किसी जिले में सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य कर्मियों के द्वारा बरती जा रही लापरवाही का खामियाजा मरीजों का भुगतना पड़ रहा है। एक ऐसा ही मामला बुधवार को गिरिडीह के सदर अस्पताल में भी सामने आया है, जिसने अस्पताल प्रबंधन की पोल खोल दी है। स्वास्थ्य कर्मियों की लापरवाही के कारण अस्पताल में इलाज़रत एक छात्रा की तबीयत बिगड़ गई और इसके बाद परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया।



बताया जाता है कि शहर के अरगाघाट रोड निवासी सुरेंद्र श्रीवास्तव की पुत्री नम्रता अखोरी की तबियत अचानक बिगड़ गई। जिसके बाद उसकी माँ आभा देवी उसे लेकर इलाज के लिए सदर अस्पताल पहुंची। जहां चिकित्सकों ने उसे तुरंत भर्ती करने की सलाह दी। परिजन तुरंत नम्रता को अस्पताल में भर्ती करा दिया। नम्रता की माँ आभा देवी और पिता सुरेंद्र श्रीवास्तव की माने तो अस्पताल में भर्ती होने के बाद जैसे ही उनकी बेटी को स्लाइन चढ़ाया गया, वैसे ही उनकी बेटी की तबियत ओर भी ज्यादा बिगड़ने लगी। स्लाईन चढ़ाने के बाद उसे ठंड लगने लगी। उन्होंने तुरंत बेटी को लेकर नीजि चिकित्सक के पास पहुंचे तो उन्होंने जो दवा और स्लाइन दिया उससे उनकी बेटी की हालत में सुधार हुआ।

उन्होंने बताया की जब बेटी की तबियत खराब हुई और वेलोग डॉक्टर के पास गए तो डॉक्टर उल्टा-पुल्टा बोलने लगे और डाँट-फटकार लगाने लगे। फिर जब बेटी को लगाया गया स्लाइन देखा तो पाया कि उस स्लाइन के बोतल में रैपर नही लगा हुआ था, जिसके बाद सभी लोग गुस्से में आ गए। बताया कि अस्पताल में प्रबंधन के द्वारा बड़ी लापरवाही बरती जा रही है।
इधर मामले को लेकर सिविल सर्जन डॉ. बच्चा सिंह ने बताया की इस तरह का मामला उनके संज्ञान में आया है। अस्पताल में सभी एक्सप्यारी दवाईयां तीन महीने पहले ही हटा दी जाती है और जिसमें कोई रैपर नहीं रहता है उसका इस्तेमाल ही नहीं होता है। उन्होंने कहा की वे मामले की जांच करेंगे।
