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आपातकाल के मीसाबंदी पूर्व विधायक लक्ष्मण स्वर्णकार और कृष्ण रंजन प्रसाद को भाजपाईयों ने किया सम्मानित

1975 का आपातकाल भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय: रंजीत राय

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गिरिडीह। भाजपा गिरिडीह महानगर जिला कमिटी द्वारा आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ के मौके पर आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करते हुए जेल जाने वाले वरिष्ठ लोकतंत्र सेनानी एवं मीसाबंदी को सम्मानित किया गया। इस दौरान वरिष्ठ लोकतंत्र सेनानी एवं मीसाबंदी पूर्व विधायक लक्ष्मण स्वर्णकार और कृष्ण रंजन प्रसाद (लोकतंत्र सेनानी संघ) को सम्मानित किया गया। जिला अध्यक्ष रंजीत राय के नेतृत्व में भाजयुमो के प्रदेश मंत्री संजीव कुमार, जिला उपाध्यक्ष देवराज, जिला महामंत्री संदी डंगेयच, जिला मंत्री सुरेश मंडल, संजय सिंह, अनूप सिन्हा उनके आवास पर पहुंचे और अंगवस्त्र भेंट कर उनके अदम्य साहस, त्याग और लोकतंत्र के प्रति समर्पण का सम्मान किया।

मौके पर जिलाध्यक्ष रंजीत राय ने कहा कि 25 जून 1975 को लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे बड़ा काला अध्याय था। उस समय अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगा दिया गया, लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया गया, विपक्षी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को बिना किसी न्यायिक प्रक्रिया के जेलों में बंद कर दिया गया तथा संविधान की मूल भावना को आघात पहुंचाया गया। ऐसे कठिन दौर में अनेक राष्ट्रभक्तों ने अपने व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं का त्याग कर लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष किया। आज उन लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान करना प्रत्येक लोकतंत्र प्रेमी नागरिक का नैतिक दायित्व है।

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कहा कि आपातकाल के कठिन समय में लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए अनेक राष्ट्रभक्तों ने जेल की यातनाएं झेलीं, जिनमें पूर्व विधायक लक्ष्मण स्वर्णकार और वरिष्ठ लोकतंत्र सेनानी एवं मीसाबंदी श्री कृष्ण रंजन प्रसाद का योगदान भी अविस्मरणीय है। उनके संघर्ष, साहस एवं लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पण को सम्मानित करना हम सभी के लिए गर्व की बात है।

मौके पर उपस्थित अन्य भाजपा नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों का संघर्ष केवल उस समय की सरकार के विरोध तक सीमित नहीं था, बल्कि वह भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों, नागरिक अधिकारों और संविधान की रक्षा के लिए किया गया ऐतिहासिक आंदोलन था। ऐसे सेनानियों के त्याग और बलिदान के कारण ही देश में पुनः लोकतंत्र की स्थापना संभव हो सकी। नई पीढ़ी को भी इस इतिहास से अवगत कराना आवश्यक है ताकि लोकतंत्र की रक्षा के प्रति समाज सदैव जागरूक रहे।

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