ऐतिहासिक सौगात: गिरिडीह में बनेगा झारखंड-बिहार का सबसे बड़ा मेगा चिड़ियाघर
कैबिनेट की मंजूरी के साथ खुला विकास का नया अध्याय, पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार की पहल लाई रंग

नव बिहान डेस्क : झारखंड सरकार ने गिरिडीह को एक ऐसी ऐतिहासिक सौगात दी है, जो आने वाले वर्षों में जिले की पहचान और तस्वीर दोनों बदल सकती है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक में गिरिडीह में झारखंड और बिहार का सबसे बड़ा आधुनिक मेगा चिड़ियाघर (ज़ू) स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। सरकार का मानना है कि यह परियोजना राज्य में पर्यटन, वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगी।
पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार की पहल को मिली बड़ी सफलता


इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर लाने में झारखंड के पर्यटन मंत्री एवं गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार की पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लंबे समय से गिरिडीह की प्राकृतिक विरासत और पर्यटन क्षमता को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के प्रयासों के तहत उन्होंने इस परियोजना को प्राथमिकता दी। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब यह सपना साकार होने की दिशा में आगे बढ़ गया है।
करीब 150 करोड़ रुपये की लागत से होगा निर्माण
सरकारी स्वीकृति के अनुसार, मेगा चिड़ियाघर के निर्माण पर करीब ₹150 करोड़ खर्च किए जाएंगे। यह परियोजना आधुनिक चिड़ियाघर की अवधारणा पर आधारित होगी, जहां वन्यजीवों के लिए प्राकृतिक परिवेश विकसित किया जाएगा तथा पर्यटकों के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
पीरटांड़ बनेगा नई पर्यटन पहचान का केंद्र
प्रस्तावित मेगा ज़ू का निर्माण गिरिडीह पूर्वी वन प्रमंडल के पीरटांड़ क्षेत्र में किया जाएगा। पारसनाथ पर्वत की तलहटी और घने वन क्षेत्र के निकट स्थित यह इलाका जैव विविधता और प्राकृतिक सौंदर्य से समृद्ध है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थान आधुनिक चिड़ियाघर के लिए अत्यंत उपयुक्त है और भविष्य में पूर्वी भारत के प्रमुख इको-टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है।
रोजगार, कारोबार और पर्यटन को मिलेगा नया जीवन
मेगा ज़ू के निर्माण से गिरिडीह में पर्यटन गतिविधियों को जबरदस्त बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। प्रतिवर्ष लाखों पर्यटकों के आगमन से होटल, रेस्टोरेंट, परिवहन, स्थानीय हस्तशिल्प, छोटे व्यवसाय और स्वरोजगार के नए अवसर विकसित होंगे। परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर भी सृजित होने की संभावना है।
वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण शिक्षा का बनेगा केंद्र
प्रस्तावित चिड़ियाघर केवल पर्यटन स्थल नहीं होगा, बल्कि वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन, पर्यावरण शिक्षा और अनुसंधान का भी महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। यहां आधुनिक मानकों के अनुरूप पशु बाड़े, सफारी क्षेत्र, प्रकृति व्याख्या केंद्र तथा पर्यावरण जागरूकता से जुड़ी सुविधाएं विकसित किए जाने की योजना है।
योजना एक नजर में
- परियोजना: झारखंड-बिहार का सबसे बड़ा मेगा चिड़ियाघर
- स्थान: पीरटांड़, गिरिडीह पूर्वी वन प्रमंडल
- अनुमानित लागत: लगभग ₹150 करोड़
- मंजूरी: झारखंड मंत्रिपरिषद (कैबिनेट)
- उद्देश्य: पर्यटन संवर्धन, वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण शिक्षा एवं स्थानीय रोजगार सृजन
- विशेषता: आधुनिक सुविधाओं से युक्त अंतरराष्ट्रीय मानकों का मेगा ज़ू
गिरिडीह के विकास की नई उड़ान
प्राकृतिक धरोहर, पारसनाथ पर्वत, उसरी जलप्रपात और खंडोली जैसे पर्यटन स्थलों के लिए प्रसिद्ध गिरिडीह अब एक और बड़ी पहचान की ओर बढ़ रहा है। मेगा चिड़ियाघर की स्थापना से जिला न केवल झारखंड बल्कि पूरे पूर्वी भारत के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में शामिल होने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाएगा। स्थानीय लोगों ने कैबिनेट के इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे गिरिडीह के विकास के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है।

