Nav Bihan
हर खबर पर पैनी नजर

26 सितंबर के बाद श्वेता शर्मा को मिल सकती है मंत्री पद की जिम्मेदारी!

सुदिव्य सोनू के खाली पद को भरने की तैयारी? गिरिडीह उपचुनाव को लेकर भी रणनीति पर मंथन, दूसरे मंत्री पद पर अब भी पेंच

0 16

रांची/गिरिडीह। झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर सियासी हलचल एक बार फिर तेज हो गई है। नव बिहान के सूत्रों के मुताबिक दिवंगत मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू की पत्नी श्वेता शर्मा को मंत्री पद की जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना लगातार मजबूत हो रही है। सूत्रों का दावा है कि श्वेता शर्मा के नाम को लेकर पार्टी और सरकार के भीतर फिलहाल किसी बड़े विरोध की जानकारी सामने नहीं आई है।

सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की प्राथमिकता सुदिव्य कुमार सोनू के निधन से खाली हुए मंत्री पद को जल्द भरने की है। इसके लिए 26 सितंबर के बाद शपथ ग्रहण समारोह की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक शपथ ग्रहण की तारीख या श्वेता शर्मा के नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

sawad sansar

भाद्रपद पूर्णिमा के बाद खुल सकता है रास्ता

मंत्री पद के शपथ ग्रहण को लेकर फिलहाल एक अहम तारीख 26 सितंबर मानी जा रही है। वर्ष 2026 में भाद्रपद पूर्णिमा 26 सितंबर को है। धार्मिक परंपराओं में भाद्रपद और इसके बाद आने वाले पितृपक्ष को लेकर कई परिवार शुभ कार्यों के आयोजन से परहेज करते हैं। हालांकि, यह व्यक्तिगत और धार्मिक परंपराओं से जुड़ा विषय है, इसे सरकार की ओर से शपथ ग्रहण टालने का आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है।
ऐसे में सत्ता के गलियारों में चर्चा है कि 26 सितंबर के बाद किसी भी दिन राजभवन में शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जा सकता है।

श्वेता के नाम के पीछे भावनात्मक रिश्ता भी अहम

श्वेता शर्मा के नाम की चर्चा के पीछे राजनीतिक के साथ-साथ व्यक्तिगत और पारिवारिक समीकरणों को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दिवंगत सुदिव्य कुमार सोनू और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बीच लंबे समय से करीबी राजनीतिक और व्यक्तिगत संबंध रहे हैं। सुदिव्य के निधन के बाद मुख्यमंत्री ने उन्हें सभी मौकों पर बड़े भाई के रूप में याद किया। अंतिम संस्कार में मुख्यमंत्री की मौजूदगी और बाद में 17 सितंबर को गिरिडीह में आयोजित श्राद्ध कार्यक्रम में उनकी भागीदारी भी इस रिश्ते की सार्वजनिक अभिव्यक्ति के तौर पर देखी गई।
वहीं, मुख्यमंत्री की पत्नी और विधायक कल्पना सोरेन भी सोनू के आवास पहुंचकर शोकाकुल परिवार से ना सिर्फ मिली थीं बल्कि इस मौके पर हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन जिस तरह से भावुक दिखे, वो ये जताने के लिए काफी था कि इस परिवार के साथ उनके कैसे गहरे रिश्ते हैं। इन घटनाओं के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हुई कि सोनू के परिवार के साथ सरकार और सोरेन परिवार की नजदीकी आने वाले राजनीतिक फैसले में भी दिखाई दे सकती है।

झारखंड में पहले भी दोहराया जा चुका है ऐसा फॉर्मूला

श्वेता शर्मा के नाम की चर्चा को समझने के लिए झारखंड की पिछली राजनीति के उदाहरण भी महत्वपूर्ण हैं। 2023 में तत्कालीन मंत्री जगरनाथ महतो के निधन के बाद उनकी पत्नी बेबी देवी को हेमंत सोरेन सरकार में मंत्री बनाया गया था। इससे पहले भी 2020 में मंत्री हाजी हुसैन अंसारी के निधन के बाद उनके पुत्र हफीजुल हसन को मंत्री बनाया गया था। हफीजुल हसन ने फरवरी 2021 में मंत्री पद की शपथ ली थी।
इसी पृष्ठभूमि में राजनीतिक विश्लेषण में श्वेता शर्मा के नाम को भी उसी तरह के राजनीतिक उत्तराधिकार के संभावित मॉडल से जोड़कर देखा जा रहा है।

गिरिडीह उपचुनाव सबसे बड़ा राजनीतिक फैक्टर

सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद गिरिडीह विधानसभा सीट खाली हो चुकी है और यहां उपचुनाव होना है। ऐसे में मंत्री पद और उपचुनाव—दोनों घटनाक्रम एक-दूसरे से जुड़े हुए दिखाई दे रहे हैं।
2024 के विधानसभा चुनाव में सुदिव्य कुमार सोनू ने गिरिडीह सीट पर भाजपा के निर्भय कुमार शाहाबादी को 3,838 वोटों के अंतर से हराया था। सोनू को 94,042 और शाहाबादी को 90,204 वोट मिले थे। यानी लगातार दूसरी बार जीत दर्ज करने के बावजूद मुकाबला काफी करीबी रहा था।
यही वजह है कि राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि यदि श्वेता शर्मा को मंत्री पद देकर गिरिडीह उपचुनाव में उतारा जाता है, तो पार्टी सुदिव्य सोनू के प्रति मौजूद भावनात्मक जुड़ाव और सहानुभूति को चुनावी समर्थन में बदलने की कोशिश कर सकती है। हालांकि, यह राजनीतिक आकलन है, न कि चुनावी परिणाम की कोई निश्चित भविष्यवाणी।

दूसरे मंत्री पद पर अब भी तस्वीर साफ नहीं

हेमंत सोरेन सरकार के सामने सिर्फ सुदिव्य कुमार सोनू के रिक्त पद को भरने की चुनौती नहीं है। रामदास सोरेन के निधन के बाद भी मंत्रिमंडल में एक पद खाली है। इस तरह फिलहाल दो मंत्री पदों को लेकर राजनीतिक चर्चा चल रही है।
नव बिहान के सूत्रों के अनुसार, श्वेता शर्मा के नाम को लेकर तस्वीर अपेक्षाकृत साफ दिखाई दे रही है, लेकिन दूसरे मंत्री पद को लेकर झामुमो और सरकार के भीतर अभी भी सहमति बनाने की कवायद जारी है। किस सामाजिक, क्षेत्रीय और राजनीतिक समीकरण को प्राथमिकता दी जाए, इस पर मंथन बताया जा रहा है।

अब नजर 26 सितंबर के बाद के फैसले पर

फिलहाल श्वेता शर्मा के मंत्री बनने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। लेकिन नव बिहान के सूत्रों के मुताबिक 26 सितंबर के बाद मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर फैसला सामने आ सकता है।
यदि ऐसा होता है तो यह सिर्फ एक मंत्री पद भरने की कवायद नहीं होगी, बल्कि इसके साथ गिरिडीह विधानसभा उपचुनाव की रणनीति भी जुड़ी होगी। ऐसे में आने वाले दिनों में श्वेता शर्मा के नाम पर होने वाली राजनीतिक गतिविधियां और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अगली रणनीति पर सभी की नजर रहेगी।

ITI
Leave A Reply

Your email address will not be published.