पारसनाथ पहाड़ पर स्वामित्व को लेकर एक बार फिर जैन समुदाय और आदिवासी समुदाय के बीच गहराने लगा विवाद
प्रेसवार्ता कर आदिवासी समुदाय ने जताई नाराजगी, जैन समाज के संजय जैनपर लगाये कई आरोप

गिरिडीह। गिरिडीह के मधुबन स्थित पारसनाथ पहाड़ पर स्वामित्तव को लेकर एक बार फिर जैन समुदाय और आदिवासी समुदाय के बीच विवाद गहराने लगा है। सोमवार को गिरिडीह में मारांग बुरू बचाओ संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष महावीर मुर्मू, सचिव विष्णु किस्कू, प्रवक्ता सुधीर बास्के, सुरेश हेमराम, मदन हेमराम, सुशांत प्रसाद सोरेन, दिलीप मुर्मू ने संयुक्त रूप से प्रेसवार्ता कर कहा कि दशकों से मधुबन के पारसनाथ पहाड़ में जैन समाज अपने तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ की पूजा करता आ रहा है। वहीं दूसरी तरफ आदिवासी समुदाय भी उसी पहाड़ में अवस्थित मरांग बुरु जुग ज़ाहिर थान में पूजा करता आ रहा है। दोनों के बीच कही कोई विवाद नहीं है, लेकिन दिल्ली के रहने वाले संजय जैन ने अपना पद का धौंस दिखाकर जबरन पार्श्वनाथ पहाड़ पर कब्जा जमाने का प्रयास कर रहे है।
प्रेसवार्ता के माध्यम से आदिवासी समाज के नेताओं ने संजय जैन पर आरोप लगाते हुए कहा कि संजय जैसे व्यक्ति के कारण पूरा जैन समाज बदनामी के कगार पर है। ऐसे में आदिवासी समुदाय मांग करता है कि पारसनाथ पहाड़ का महत्व रहने दंे। कहा कि आदिवासी समुदाय शांतिप्रिय है। वो जैन समाज के सर्वाेच्च तीर्थस्थल के महत्व को समझता है, लेकिन आदिवासी समुदाय भी अपने मरांग बुरु जुग ज़ाहिर थान के पवित्रता पर आंच सहन नहीं कर सकता है।


कहा कि पीरटांड़ अंचल अधिकारी ने एक रिपोर्ट दिया है जिसमें ये जिक्र था कि मधुबन मोड़ से लेकर पूरे मधुबन को जैन समाज ने अतिक्रमण कर रखा है। जैन समाज के लोगोें के द्वारा बड़े बड़े भवनों का निर्माण किया जा रहा है। पहाड़की तलहटी को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। जिससे पारसनाथ पहाड़ का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।

