जातिगत जनगणना को लेकर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा का आंदोलन तेज, राष्ट्रपति के नाम उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन

गिरिडीह। जाति आधारित जनगणना को लेकर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा ने केंद्र सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी विकास पटेल ने देश में सभी जातियों की समग्र जनगणना नहीं कराए जाने पर नाराजगी जताते हुए तीन चरणों में राष्ट्रव्यापी आंदोलन की घोषणा की है।
आंदोलन के पहले चरण के तहत सोमवार को महामहिम राष्ट्रपति के नाम उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा गया। वहीं दूसरे चरण में 5 जून को धरना-प्रदर्शन तथा तीसरे चरण में 22 जून को देशभर के जिला मुख्यालयों में रैली और प्रदर्शन किया जाएगा।


इस संबंध में मोर्चा के जिला अध्यक्ष दिलीप कुमार पटवा ने कहा कि केंद्र की आरएसएस समर्थित बीजेपी सरकार अधूरी जनगणना करा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनगणना में संसाधन खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन सभी जातियों का पूरा डाटा एकत्रित नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश के साधन-संसाधन, नौकरी और व्यापार पर कुछ खास जातियों का कब्जा है, जबकि बड़ी आबादी आज भी रोजी-रोटी के लिए संघर्ष कर रही है। कहा कि ओबीसी के वोट से सत्ता में आई बीजेपी सरकार पिछड़े वर्गों के साथ धोखेबाजी कर रही है। सही जातिगत आंकड़ों के बिना विकास की बात करना केवल छलावा है।
वहीं प्रवीण कुमार ने कहा कि जनगणना की हाउस लिस्टिंग डिजिटल तरीके से की जा रही है, जिससे सरकार के पास कोई ठोस भौतिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं रहेगा। उन्होंने गिरिडीह जिले में अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग के युवक-युवतियों की बढ़ती हत्या की घटनाओं पर भी चिंता जताई। उन्होंने सिरसिया गांव की अनुसूचित जाति की बालिका पायल कुमारी की हत्या पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और कड़ी सजा की मांग की।
