Nav Bihan
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राजनीतिक संरक्षण, पैसा या प्रशासनिक सहयोग ? – खुलेआम घूम रहे हैं जमुआ के चर्चित गोलीकाण्ड मामले में फरार आरोपी

न्यायालय ने जमानत पर सुनवाई के लिए दी फिर तारीख, सुस्त पड़ी पुलिस

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गिरिडीह। गिरिडीह जिले में जमीन पर कब्जा करने को लेकर गोली चलाना आम बात हो गई है, जरूरत है तो सिर्फ राजनीतिक संरक्षण, पैसा और प्रशासनिक सहयोग की। अगर आपके पक्ष में ये सभी चीजें हैं तो आप आसानी से गोली फायरिंग की घटना को अंजाम देकर कुछ दिनों की लुका-छिपी के बाद खुलेआम घूम सकते हैं। ऐसे में जब कोई एक पक्ष गोलीकांड की घटना को अंजाम देकर खुलेआम घूम सकता है तो जाहिर सी बात है कि इससे कुछ और लोग भी प्रोत्साहित होते हैं और वे भी इस तरह की घटना को अंजाम देते हैं। बीती रात जमुआ थाना क्षेत्र में एक बार फिर हुई गोली फायरिंग की घटना कुछ ऐसी ही है। हालांकि बीती रात हुई गोली फायरिंग की घटना के मामले में जमुआ पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 24 घंटे के अंदर एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। पर पिछले माह सुर्खियों में रही जमुआ थाना क्षेत्र में हुई गोली फायरिंग की घटना के मामले में संलिप्त कई मुख्य अभियुक्त अब भी पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं और उनमें से कुछ अब तो खुले आम घूम रहे हैं। यहां तक कि वे नये वर्ष पर आयोजित होने वाले वनभोज में कई मानिन्दों के साथ शामिल होकर लुत्फ भी उठा रहे हैं।

विदित हो कि करीब एक माह पूर्व जमुआ थाना क्षेत्र के कारोडीह में एक बड़े भूभाग पर कब्जे को लेकर एक ही राजनीतिक दल के दो बड़े जमीन माफिया आपस में भिड़ गए थे। दोनों ओर से गोली फायरिंग और पेट्रोल बम भी चले थे, जिससे इलाके में दहशत फैल गई थी। तब जमीन के रैयत और पुलिस दोनों के द्वारा ही प्राथमिकी दर्ज की गई और मामले में संलिप्त छोटे छोटे प्यादे को दबोचा भी गया, लेकिन मुख्य आरोपियों में शामिल कई रसूखदारों, मसलन झामुमो के नगर सचिव सन्नी रैन, विशाल मंडल व खोड़ा गिरोह के सरगना राजा खोरा को पुलिस अब तक पकड़ नहीं पाई है।

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मामले में गिरिडीह की निचली अदालत ने तीनों मुख्य आरोपियों समेत कई अन्य आरोपियों की जमानत याचिका ख़ारिज कर दी है। जिसके बाद बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में जमानत याचिका दायर की है, जिस पर नए साल में सोमवार को तीसरी बार सुनवाई भी हुई। इस दौरान केस डायरी भी जमुआ पुलिस ने कोर्ट में दाखिल कर दी है। अब तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विशाल कुमार की अदालत ने बेल के लिए सुनवाई के लिए अगली तारीख मुक़रर्र की है। हालांकि इस दौरान न्यायालय ने फरार आरोपियों की गिरफ्तारी पर फिलहाल कोई रोक भी नहीं लगाई है। बावजूद इसके पुलिस इन लोगों को गिरफ्तार नहीं कर पा रही है। आपको बता दें कि ज़िले के पुलिस कप्तान डॉ विमल कुमार ने भी इस घटना के बाद सख्त रुख अपनाते हुए साफ शब्दों में कहा था कि आरोपियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे में कुछ आरोपियों का खुलेआम घूमना कई सवालों को जन्म देता है।

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