पौष पूर्णिमा के मौके पर लंगटेश्वरी बाबा की समाधि स्थल पर चादरपोशी के लिए उमड़ी भीड़ श्रद्धा व सौहार्द के साथ बाबा के अनुयायियों ने की चादरपोशी
सुबह 3.15 बजे जमुआ थाना प्रभारी ने की बाबा की समाधि पर पहली चादरपोशी

गिरिडीह। जिले के जमुआ प्रखंड के खरगडीहा स्थित लगंटेश्वेर बाबा के समाधि स्थल पर पौष पूर्णिमा के मौके पर शनिवार को बाबा की 116वीं वार्षिक समाधि पर्व श्रद्धा, आस्था और सामाजिक सौहार्द के साथ मनाया गया। इस मौके पर झारखंड के अलावे दूसरे राज्यों से भी हजारों की संख्या में बाबा के अनुयायी खरगडीहा पहुंचे हुए थे। कड़ाके की ठंड के बावजूद शनिवार की अहले सुबह से ही बाबा के समाधि स्थल पर चादरपोशी के लिए लोगों की भीड़ उमड़ी हुई थी। इस मौके पर बाबा के समाधि स्थल के आस पास विशाल मेला का भी आयोजन किया गया है, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी हुई है। खरगडीहा स्थित संत लंगटा बाबा की समाधि न केवल हिंदू समाज, बल्कि मुस्लिम समुदाय के लिए भी गहरी आस्था का केंद्र है। इसे झारखंड और बिहार के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। यहां हर धर्म और वर्ग के लोग अपनी मन्नतें लेकर पहुंचते हैं और बाबा की समाधि पर चादरपोशी करते है। यह स्थल वर्षों से हिंदू–मुस्लिम एकता और सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक बना हुआ है।मान्यताओं के अनुसार संत लंगटा बाबा, जिनका मूल नाम लंगेश्वरी बाबा बताया जाता है, 1870 के दशक में नागा साधुओं की एक टोली के साथ खरगडीहा पहुंचे थे। बाद में अन्य साधु चले गए, लेकिन बाबा ने खरगडीहा थाना परिसर के समीप रहकर अपनी धुनी रमाई। वर्ष 1910 में उन्होंने यहीं समाधि ली। बाबा को पीड़ित मानवता का उद्धारक माना जाता है। उनसे जुड़ी कई लोककथाएं प्रचलित हैं, जिनमें बीमार मनुष्यों और पशुओं के उनके आशीर्वाद से स्वस्थ होने की मान्यताएं शामिल हैं।परंपरा के अनुसार बाबा की समाधि पर पहली चादर जमुआ थाना प्रभारी द्वारा चढ़ाई जाती है। यह परंपरा ब्रिटिश काल से चली आ रही है। शनिवार की सुबह करीब 3.15 बजे जमुआ थाना प्रभारी विभूति देव ने बाबा की समाधि पर पहली चादरपोशी की। इसके बाद खोरीमहुआ के एसडीएम, एसडीपीओ और जमुआ पुलिस निरीक्षक ने भी चादरपोशी की। इसके पश्चात श्रद्धालुओं के लिए समाधि स्थल का द्वार खोल दिया गया।निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सुबह 3.30 बजे से दोपहर 1 बजे तक हिंदू समाज के श्रद्धालुओं द्वारा चादरपोशी की जाएगी, जबकि दोपहर 1.15 बजे से शाम 5 बजे तक मुस्लिम समुदाय के लोग बाबा की समाधि पर चादरपोशी करेंगे।
मेले को लेकर प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए है। सीसीटीवी कैमरे, नियंत्रण कक्ष और अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। हर साल की तरह इस बार भी उमड़ी भारी भीड़ यह दर्शाती है कि मानवता की सेवा करने वाले संत आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं। यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक समरसता और भाईचारे का सशक्त संदेश देता है।
