Nav Bihan
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जंग, महंगाई और मानवीय त्रासदी के त्रिकोण से महाविनाश! तेल से दवा तक पर आफत, 95 देशों ने बढ़ायी बढ़ायी पेट्रोलियम की कीमतें/ रिकॉर्ड तोड़ती महंगाई के बीच सूख रहे संसाधन, भारत भी चपेट में/ भारत में यूरिया उत्पादन में भारी गिरावट आने की आशंका

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(अमित राजा) इन दिनों रसद और राहत पर युद्ध का पहरा है। फार्मा सेक्टर और ग्लोबल सप्लाई चेन गहरे संकट में है। और, कहीं से मसअलों के हल का कोई रास्ता नहीं दिख रहा। क्योंकि, युद्ध तो खुद सबसे बड़ा मसअला है। ऐसे में, अगर कहीं से युद्ध में हार-जीत की बात हो रही है तो ये बेमानी है। दरअसल, हारती हुई तो पूरी दुनिया दिख रही है। तेहरान और होर्मुज जलडमरूमध्य यानी ‘स्ट्रैट ऑफ हार्मूज’ में 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए सैन्य संघर्ष के बाद वैश्विक ऊर्जा और आपूर्ति श्रृंखला (स्पलाई चेन) में 1970 के दशक के बाद का सबसे बड़ा संकट देखा जा रहा है।

95 देशों ने बढ़ायी तेल की कीमतें 

sawad sansar

वैश्विक डेटा प्लेटफॉर्म ‘ग्लोबल पेट्रोल प्राइसेज’ के अनुसार अब तक कम से कम 95 देशों ने पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में वृद्धि की रिपोर्ट दी है। कतर की ओर से प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की आपूर्ति पर ‘फोर्स मेज्योर’ घोषित करने से यूरोप और एशिया के कई देशों में घरेलू गैस यानी पीएनजी और एलपीजी के दाम भी 24 से 50 प्रतिशत तक बढ़ गये हैं।

ऑस्ट्रेलिया और वियतनाम में खुदरा कीमतें

ऑस्ट्रेलिया और वियतनाम में मार्च के पहले दो हफ्तों में कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। ऑस्ट्रेलिया में खुदरा खरीदारों के लिए पेट्रोल की कीमतों में लगभग 18.2 फीसद की वृद्धि हुई है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में कीमतें 1.31 डॉलर प्रति लीटर के पार चली गयी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संकट 3 महीने आगे खिंचा तो कीमतें 1 डॉलर प्रति लीटर और बढ़ सकती हैं। वियतनाम में तो बढ़ी कीमतों का सबसे अधिक असर दिखा है, जहां पेट्रोल की खुदरा कीमतों में 49.7 प्रतिशत का भारी उछाल दर्ज किया गया है।

श्रीलंका में हो रही पेट्रोलियम की राशनिंग

श्रीलंका ने अपने 2022 के आर्थिक संकट वाले ‘कोटा सिस्टम’ को फिर से लागू कर दिया है। यहां 15 मार्च 2026 से ‘नेशनल फ्यूल पास’ (क्यूआर कोड) अनिवार्य कर दिया गया है। बिना कोड के किसी भी पंप से ईंधन नहीं मिलेगा। साप्ताहिक कोटा तय कर दिया गया है। कारों के लिए 15 लीटर, मोटरसाइकिलों के लिए 5 लीटर और तिपहिया वाहनों के लिए 15 लीटर प्रति सप्ताह का कोटा तय किया गया है। बसों को राहत देते हुए 60 लीटर का कोटा हफ्ते में दिया गया है। साथ ही चार दिवसीय कार्य सप्ताह लागू किया गया है। ईंधन बचाने के लिए सरकार ने हफ्तों में केवल 4 दिन दफ्तर खोलने का निर्णय लिया है।

अमेरिका और भारत में स्थिति 

अमेरिका में फरवरी में जो पेट्रोल औसतन 2.94 डॉलर प्रति गैलन था वह अब बढ़कर 3.58 डॉलर पर पहुंच गया है। कैलिफोर्निया जैसे राज्यों में यह 5 डॉलर प्रति गैलन के पार है। ऊधर, युद्ध के कारण वैश्विक तेल बाजारों में अस्थिरता को देखते हुए भारत की सरकारी तेल कंपनियों ने प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में 2.00 से 2.35 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की है। हालांकि फिलहाल आम जनता को राहत देने के लिए सरकार ने रेगुलर पेट्रोल और डीजल की कीमतों को स्थिर रखा है। जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चा तेल 100 डॉलर बैरल पार कर चुका है।

भारत में दवाओं के कच्चे माल का संकट

भारतीय फार्मा उद्योग के लिए स्थिति चिंताजनक से गंभीर की ओर बढ़ रही है। यहां कच्चे माल की कमी है। दवाओं के लिए जरूरी ‘सॉल्वेंट्स’ और रसायनों की कीमतों में 20 से 60 फीसद तक की वृद्धि हुई है। पैरासिटामोल और एमोक्सिसिलिन जैसी जरूरी दवाओं का उत्पादन महंगा हो गया है। सरकारी दावों के अनुसार भारत के पास 4-5 महीने का बफर स्टॉक है। लेकिन, उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि निजी कंपनियों के पास केवल 30 से 45 दिन का ही कच्चा माल बचा है। यदि सप्लाई चेन 4 हफ्ते और बाधित रही तो दवाओं की किल्लत शुरू हो सकती है। दूसरी ओर भारत में यूरिया का उत्पादन मुख्य रूप से प्राकृतिक गैस पर आधारित है। सरकार ने गैस की कमी को देखते हुए फर्टिलाइजर प्लांटों को मिलने वाली गैस में 25-30% की कटौती की है। इससे घरेलू यूरिया उत्पादन में प्रति माह लगभग 8 लाख टन की गिरावट आने की आशंका है।

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