एक बार फिर जी का जंजाल बना गिरिडीह–पचंबा मुख्य मार्ग नाली व पुलिया निर्माण के नाम पर सड़क बाधित, परीक्षा देने जा रहे छात्रों की बढ़ी परेशानी
जनसमस्याओं पर बोलने वाले जनप्रतिनिधि निगम चुनाव में व्यस्त, जनता पस्त

गिरिडीह : (रिंकेश कुमार) नगर निगम चुनाव को लेकर जहां पूरा शहर चुनावी सरगर्मी में डूबा हुआ है और मेयर से लेकर पार्षद प्रत्याशी तक जनसमस्याओं को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर गिरिडीह–पचंबा मुख्य मार्ग एक बार फिर आम लोगों के लिए जी का जंजाल बन गया है। नाली व पुलिया निर्माण के नाम पर सड़क को आंशिक रूप से काट दिए जाने के कारण घंटों जाम की स्थिति बन रही है, जिससे आम राहगीरों के साथ-साथ स्कूली बच्चों और परीक्षार्थियों को भारी फजीहत उठानी पड़ रही है
गिरिडीह–पचंबा मुख्य मार्ग स्थित भंडारीडीह मवेशी अस्पताल के समीप तथा अलकापुरी के आगे सड़क चौड़ीकरण के दौरान नाला निर्माण के लिए सड़क को बाधित कर दिया गया है। इसके चलते इस व्यस्त मार्ग पर आए दिन जाम लग रहा है। सुबह स्कूल जाने और छुट्टी के समय स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जब वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं।


विदित हो कि इसी मार्ग पर संचालित कार्मेल स्कूल, हनी होली स्कूल, होली क्रॉस सहित कई प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में इन दिनों वार्षिक परीक्षाएं चल रही हैं। इसके अलावा मैट्रिक और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं भी जारी हैं। ऐसे संवेदनशील समय में सड़क को आधा काटकर बाधित किए जाने से परीक्षा देने जा रहे छात्र अक्सर जाम में फंस जाते हैं, जिससे उनका मानसिक तनाव बढ़ रहा है और समय पर परीक्षा केंद्र पहुंचना भी चुनौती बन गया है।
गौरतलब है कि गिरिडीह के सबसे व्यस्ततम मार्गों में शामिल गिरिडीह–पचंबा मुख्य मार्ग को फोरलेन बनाने की दिशा में राज्य के नगर विकास मंत्री सह सदर विधायक सुदिव्य कुमार सोनू द्वारा पहल की गई थी। करीब दो वर्षों से इस मार्ग पर निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन संवेदक और संबंधित विभागों की लापरवाही के कारण लोगों को लगातार परेशानी झेलनी पड़ रही है। कुछ दिनों तक लोगों को जाम से राहत मिली थी, लेकिन निगम चुनाव और परीक्षाओं के दौरान ही दो स्थानों पर एक साथ नाली व पुलिया निर्माण शुरू कर सड़क को बाधित कर देना कई सवाल खड़े करता है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि न तो किसी प्रशासनिक अधिकारी की इस ओर नजर जा रही है और न ही जनसमस्याओं को मुद्दा बनाकर चुनावी मैदान में उतरे जनप्रतिनिधियों को आम जनता और स्कूली बच्चों की परेशानी से कोई सरोकार नजर आ रहा है।
अब सवाल यह उठता है कि क्या विकास कार्यों की कोई समय-सीमा और योजना नहीं होती? और क्या आम लोगों, खासकर भविष्य गढ़ने वाले छात्रों की परेशानियों को नजरअंदाज कर ही विकास संभव है?
