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महाशिवरात्रि: आस्था के रंग में रंगा कुसुम्भा का ऐतिहासिक ‘बाबा भिखारीनाथ मंदिर’, 135 साल पुराने मंदिर में उमड़ा भक्तों का सैलाब

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(गिरिडीह/गांडेय): आज महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर गांडेय प्रखंड के कुसुम्भा गांव स्थित प्रसिद्ध बाबा भिखारीनाथ शिव मंदिर में सुबह से ही “हर-हर महादेव” के जयघोष गूंज रहे हैं। आस्था और विश्वास के इस केंद्र में जलाभिषेक करने के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी हुई हैं।
1890 से जुड़ी है आस्था की डोर
बाबा भिखारीनाथ मंदिर का इतिहास बेहद गौरवशाली है। मंदिर के निर्माण की शुरुआत सन 1890 में स्थानीय निवासी भिखारी राम ने करवाई थी। कहा जाता है कि उनके वंश नहीं थे, जिसके बाद उन्होंने शिव मंदिर बनवाने का संकल्प लिया। मंदिर में स्थापित शिवलिंग को विशेष रूप से बनारस से मंगाया गया था और महेशमुंडा स्टेशन से हाथी के रथ पर रखकर गाजे-बाजे के साथ यहाँ लाया गया था। सन 1902 में प्राण-प्रतिष्ठा के बाद से ही यहाँ पूजा-अर्चना अनवरत जारी है।
बिना सीमेंट के बना है यह अद्भुत मंदिर
इस मंदिर की वास्तुकला आज के इंजीनियरों को भी हैरान करती है। इसके निर्माण में सीमेंट का प्रयोग बिल्कुल नहीं किया गया है। ईंटों की जोड़ाई के लिए सुर्खी चूना, बेल का लट्ठा, उड़द दाल, गुड़ और लाह का विशेष मिश्रण तैयार किया गया था। यही कारण है कि यह मंदिर गर्मियों के दिनों में भी प्राकृतिक रूप से वातानुकूलित (AC) जैसा ठंडा रहता है।

मनोकामना पूर्ण करते हैं बाबा
स्थानीय लोगों का मानना है कि बाबा भिखारीनाथ के दरबार से कोई खाली हाथ नहीं लौटता। यहाँ सावन और महाशिवरात्रि पर विशेष भीड़ होती है। पुजारी और बुजुर्ग बताते हैं कि यहाँ शिवलिंग पर 101 बेलपत्र चढ़ाने की विशेष परंपरा है, जिससे बाबा की असीम कृपा बरसती है। शादी-विवाह हो या मुंडन, हर शुभ कार्य के लिए लोग बाबा का आशीर्वाद लेने यहाँ जरूर आते हैं।
आज महाशिवरात्रि के मौके पर मंदिर परिसर में मेले जैसा माहौल है और प्रशासन भी भीड़ को नियंत्रित करने में मुस्तैद है।

 

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